Betterlife with steem/ The diary game / date-28sptember 2021/HAPPY BIRTHDAY BHAGAT SINGH.

in hive-196725 •  19 days ago 

हेलो स्टीमियंस

आप सभी को गुड मॉर्निंग मैं शुभम भगत स्टिमिट डायरी गेम ब्लॉग पर अपने आज के पोस्ट के साथ उपस्थित हूं दोस्तों मैं आप सबके साथ अपनी आज की पोस्ट शेयर करने जा रहा हूं। सबसे पहले दोस्तों मैं आपको बता दूं की आज द यूथ आईकॉन, लीडर, ग्रेट फ्रीडम फाइटर, शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म दिवस है दोस्तों भगत सिंह के जन्मदिवस पर मैं पूरे स्टीमेट फैमिली और हर एक भारतवासी की तरफ से आप सभी को बधाई देता हूं। दोस्तों मैं सोच रहा हूं कि क्यों ना आज के पोस्ट की शुरुआत भगत सिंह के बारे में बात करके की जाए भगत सिंह एक महान क्रांतिकारी जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अपना बहुमूल्य जीवन कुर्बान कर दिया। दोस्तों यूं तो हम भगत सिंह के बारे में जानते हैं पर उनके बारे में बहुत सी बातें हैं जो हम नहीं जानते जैसे भगत सिंह किताबों के बहुत बड़े शौकीन से शानदार लिटरेचर पढ़ना उनका सबसे बड़ा शौक था जैसे कि पाल बाईला की किताब द साइकोलॉजी आफ बम कामा लेनिन की किताब तथा मार्क्स उनके सबसे प्रमुख और पसंदीदा लेखकों में से थे। इसके अलावा उन्होंने सावरकर और स्वामी विवेकानंद को भी बहुत पढ़ा था उनकी जेब में हमेशा कोई न कोई किताब जरूर मिलती थी। दोस्तों हम में से बहुत से लोग ऐसा सोचते हैं की भगत सिंह जैसे क्रांतिकारी सिर्फ बंदूक के माध्यम से क्रांति करते थे लेकिन उन्होंने कहा था-(Bombs and pistols do not make a revolution. The sword of revolution is sharpened on the whetting stone of ideas.”)

बमों और बंदूकों से क्रांति नहीं लाई जा सकती क्रांति की तलवार विचारों की रगड़ कर ही धार पाती है।

दोस्तों आज हम भारतीय बहुत बार भगत सिंह और महात्मा गांधी के बीच तुलना करने लग जाते हैं जबकि इन दोनों में बहुत सी बातें समान हैं जैसे कि जहां महात्मा गांधी कहते हैं ''आप मुझे मार सकते हैं मेरे शरीर को मार सकते हैं पर मेरे आत्मा को नहीं।'' इसी तरह भगत सिंह भी कहते हैं- ''By crushing individuals they cannot kill ideas.”
फ्रेंड्स भगत सिंह मेरे चाहते हैं मैं आप सबके साथ भगत सिंह की एक पुस्तक भी शेयर कर रहा हूं जिसे मलविंदर जीत सिंह बड़ा एज ने लिखी है जिसका नाम है भगत सिंह अमर विद्रोही दोस्तों मैं आपके साथ उसकी एक फोटो शेयर कर रहा हूं
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मैं इस पुस्तक में भगत सिंह द्वारा लिखी गई एक शानदार लेख को आपके सामने रखने जा रहा हूं जिसे पड़ेगा जरूर
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आइए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में भगत सिंह और उनके साथियों के योगदान के बारे में जो मैंने पढ़ा है वह आपके सामने शेयर करने जा रहा हूं दोस्तों भगत सिंह का जन्म पंजाब में हुआ था जो आज के पाकिस्तान का हिस्सा है और इनकी पढ़ाई लाहौर यूनिवर्सिटी से हुई थी। 12 वर्ष की उम्र में ही इन्होंने जलिया वाले बाग मैं ब्रिटिश गवर्नमेंट के द्वारा किए गए निशांत हत्या को भी देखा था इसी दौरान इनके आदर्श करतार सिंह सराभा की शहादत भी हुई थी। भगत सिंह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन नाम की एक संस्था से जुड़े थे जो भारत में उस समय क्रांतिकारी गतिविधियों को चलाती जिसके संस्थापक चंद्रशेखर आजाद कोमा सचिंद्र नाथ सान्याल जैसे क्रांतिकारी थे राम प्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खान भी इससे जुड़े थे। सन 1928 में भगत सिंह ने दिल्ली के फिरोज शाह कोटला में हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन एच आर ए का नाम बदलकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन एचएसआरए किया। भगत सिंह ने अपने संबोधन में कहा था हमारी क्रांति का मतलब सिर्फ ब्रिटिशर्स को भारत से भगाना नहीं है बल्कि शोषण की उस व्यवस्था का अंत करना है जो एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति के शोषण में विश्वास रखती है मतलब हमें एक समाजवादी समाज की स्थापना करना है। भगत सिंह बटुकेश्वर दत्त के साथ ब्रिटिश असेंबली में बम फेंका था जोकि सिर्फ एक काल्पनिक बम था जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार को नींद से जगाना और भारतीयों की बात सुनाता था इसे उन्होंने कहा बहरे कानों को सुनाने के लिए गूंज की आवश्यकता होती है (if the deaf are to hear the sound has to be very loud.)
इस घटना के बाद बटुकेश्वर दत्त को काले पानी की सजा हो गई और उन्हें सेल्यूलर जेल अंडमान निकोबार भेज दिया गया। भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को लाहौर षड्यंत्र में दोषी मानकर जिसमें उन्होंने जेपी सांडर्स की हत्या की थी फांसी की सजा सुनाई गई। जब ब्रिटिश सरकार से फांसी की सजा माफ करने की गुहार लगाने के लिए इनसे कहा गया तो भगत सिंह ने कहा मुझे फांसी न दी जाए क्योंकि फांसी तो एक अपराधी को दी जाती है मैं एक क्रांतिकारी हूं अच्छा होगा मुझे चौराहे पर गोली मार दी जाए।
दोस्तों 23 मार्च सन 1931 को तत्कालीन पंजाब में भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को आधी रात को समय से पहले ही फांसी दे दी गई क्योंकि ब्रिटिश शासन को यह डर था कि कहीं फांसी की सजा के बारे में पता चलने पर जनता विद्रोह न कर दे।
लेकिन भगत सिंह के शहादत पर उनके द्वारा कही गई यह युक्ति सही हो जाती है की व्यक्तियों को मारकर आप विचारों को नहीं मार सकते।

धन्यवाद

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He is GOAT of our india and I like to read such articles keep posting such articles sir..

GOAT -YES BHAGAT SINGH IS GREAT OF ALL TIME.
THANK YOU BRO.

Aapki diary pdhkr murdon mai bhi jaan aa jayegi aisai hi likhtai rho sir.
@deepak94

Thanks @deepak94.

Interesting summary of the book too. I may surely read it in near future. But considering how strong was bhagat singh, it's sad that he had to go it would have helped our nation if he survived and wrote enough books to inspire us all. :)

#affable #india

Yes @skysnap please read the book thanks for visiting.

The great diary Bhagat Singh has made a great sacrifice for our country. Keep reading and keep sharing diary with us like this thank you very much

Thanks @ajijrathod

आपके जो भी भगत सिंह के बारे में लिखा है। उसे पढ़ने के बाद, मुझे एक एनर्जी आ गई। मुझे इस प्रकार की वास्तविक कहानी पढ़ना भी पसंद है।

मित्र भगत सिंह के बारे में पढ़कर हर भारतीय का दिल और मन ऊर्जा से भर जाता है।
Thank u for visiting.

Thank you for sharing this @subhambhagat. Nice diary from your side keep posting and have a great day.

#affable

@monali01 thank u for visiting.